Demand for Maize is Increasing for Ethanol, IIMR is Engaged in the Campaign to Increase Production

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किसानों को उन्नत किस्मों के बीज वितरित किए जा रहे हैं





मक्का तीसरा सबसे ज्यादा उगाया जाने वाला अनाज है। अब बदलते दौर में इसकी अहमियत और बढ़ गई है, क्योंकि यह न सिर्फ मानव उपभोग के लिए इस्तेमाल होता है और पोल्ट्री इंडस्ट्री की जान है, बल्कि अब यह ऊर्जा फसल के तौर पर भी बहुत तेजी से उभर रहा है। क्योंकि इसका इस्तेमाल इथेनॉल बनाने में किया जा रहा है। जिसे पेट्रोल में मिलाया जा रहा है, ताकि देश में पेट्रोलियम का आयात कम हो और खाद्य उत्पादकों को फायदा हो। किसानों को खाद्य उत्पादक होने के साथ-साथ ऊर्जा प्रदाता भी बनना चाहिए। लेकिन दिक्कत यह है कि इसका उत्पादन उतना नहीं हो पाता, जितना खाद्य और चारा और ईंधन के लिए जरूरी है। ऐसे में पर्याप्त उत्पादन की जरूरत है।















जागरूकता सह मक्का बीज वितरण कार्यक्रम





इसके लिए केंद्र सरकार ने “इथेनॉल उद्योगों के जलग्रहण क्षेत्र में मक्का उत्पादन में वृद्धि” नाम से एक परियोजना शुरू की है। जिसकी जिम्मेदारी आईसीएआर के तहत भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थान (आईआईएमआर) को दी गई है। इसके तहत मक्का उत्पादन को बढ़ाया जाएगा। इस अभियान में एफपीओ, किसान, डिस्टिलरी और बीज उद्योग को साथ लेकर काम किया जाएगा। इसके तहत फिलहाल किसानों को अधिक उपज देने वाली किस्मों के बीज बांटे जा रहे हैं। आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, मध्य प्रदेश, राजस्थान, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तर प्रदेश में अब तक डीएचएम-117 और डीएचएम-121 किस्मों के 3000 किलोग्राम बीज बांटे जा चुके हैं।

इस परियोजना का नेतृत्व कर रहे IIMR के वरिष्ठ मक्का वैज्ञानिक डॉ. एसएल जाट ने इस परियोजना के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इस परियोजना के तहत पूरे भारत में 15 राज्यों में 15 क्लस्टर बनाए गए हैं। इसके तहत 78 जिलों को शामिल किया गया है, जहां मक्का उत्पादन बढ़ाने का अभियान चलाया जाएगा। इन 15 राज्यों में आंध्र प्रदेश, असम, पंजाब, राजस्थान, मध्य प्रदेश, उतार प्रदेश।ओडिशा, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, तमिलनाडु, केरल, उत्तराखंड, कर्नाटक और हरियाणा।












इसके तहत 1500 एकड़ में मक्का की बुआई की जानी है। जिसमें से खरीफ 2024 सीजन में 1140 एकड़ का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए सभी संबंधित जिलों में उन्नत बीज वितरित किए जा रहे हैं। अब तक डीएचएम 117, डीएचएम 121, डीएमआरएच 1308 के साथ-साथ कॉर्टेवा, बायोसीड, बायर जैसी कंपनियों के बीज भी शामिल किए गए हैं।

डॉ. हनुमान सहाय जाट, निदेशक, भारतीय मक्का अनुसंधान संस्थानउन्होंने कहा कि सरकार अधिक मात्रा में इथेनॉल का उत्पादन करना चाहती है। इसके लिए मक्के का अधिक उत्पादन जरूरी है। केंद्र सरकार ने 2025-26 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य रखा है। इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ना, मक्का और कटे हुए चावल से होता है। लेकिन गन्ना और धान की फसल में पानी की खपत अधिक होती है, जबकि मक्का को बहुत कम पानी की जरूरत होती है। इसलिए इथेनॉल के लिए मक्का का उपयोग करना प्रकृति के लिए भी अच्छा रहेगा। इसके लिए आईआईएमआर 15 राज्यों के 78 जिलों के 15 जलग्रहण क्षेत्रों में सर्वोत्तम प्रबंधन पद्धतियों और उन्नत किस्मों का प्रसार कर रहा है, ताकि मक्का का उत्पादन बढ़े।












कृषि मंत्रालय ने अगले पांच सालों में मक्का उत्पादन में 10 मिलियन टन की बढ़ोतरी का लक्ष्य रखा है। इसकी वजह यह है कि पोल्ट्री फीड के लिए मक्का की मांग बढ़ रही है, इसके साथ ही इथेनॉल उत्पादन के लिए उत्पादन बढ़ाना बेहद जरूरी है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक, 2022-23 में खरीफ, रबी और ग्रीष्म सीजन में 380.85 लाख मीट्रिक टन यानी करीब 38 मिलियन टन मक्का का उत्पादन हुआ। इसे बढ़ाना समय की मांग है और आईआईएमआर इस मुहिम में शामिल हो गया है।











पहली बार प्रकाशित: 16 जुलाई 2024, 07:00 IST


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