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मुंबई28 मिनट पहलेलेखक: आशीष तिवारी
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मिर्जापुर सीरीज में रधिया का किरदार निभाने वाली एक्ट्रेस प्रशंसा शर्मा रियल लाइफ में काफी अलग है। प्रशंसा ने कहा कि लोगों को मेरा किरदार इतना रियल लगा है कि उन्हें लगता है कि मैं रियलिटी में भी रधिया जैसी ही हूं।
प्रशंसा ने कहा कि वो एक संपन्न और प्रतिष्ठित परिवार से आती हैं। बचपन से एक्टिंग में रुझान रहा है। मिर्जापुर के अलावा उन्होंने फिल्म बिच्छू का खेल में भी अहम भूमिका निभाई थी। प्रशंसा ने दैनिक भास्कर से रधिया के किरदार और अपनी निजी जीवन के बारे में खुलकर बात की है।
लोगों को ताज्जुब होता है मैं इंग्लिश बोल लेती हूं
आपका किरदार इतना रियल लगा है कि लोगों को लगता है कि आप सच में रधिया जैसी ही हो? जवाब में उन्होंने कहा, ‘लोग ये जानकर ताज्जुब खाते हैं कि मैं इंग्लिश बोल लेती हूं। लोगों को जब पता चलता है कि मैंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हिंदू कॉलेज से फिलॉसफी की पढ़ाई की है तो वे और चौंक जाते हैं। खैर मेरे लिए यह एक जीत की तरह है कि मैंने किरदार ही ऐसा निभाया है कि लोगों को यह रियल लगने लगा है।’

प्रशंसा हाल ही में मिर्जापुर के तीसरे सीजन में नजर आई हैं।
बचपन से एक्टिंग में रहा रुझान, थिएटर भी कर चुकी हैं
प्रशंसा मूल रूप से झारखंड के झुमरीतिलैया की रहने वाली हैं। उन्होंने देहरादून के बोर्डिंग स्कूल से पढ़ाई की है। इसके बाद हिंदू कॉलेज से ग्रेजुएशन किया। प्रशंसा का बचपन से एक्टिंग में रुझान था। वो स्कूल के दिनों से ही थिएटर करती रहती थीं। दिल्ली में जाकर भी उन्होंने थिएटर करना जारी रखा। इसके बाद वे मुंबई आ गईं। प्रशंसा ने फिल्म बिच्छू का खेल में पूनम का किरदार निभाया था, जिसमें भी उन्होंने काफी प्रभावित किया था।

मुंबई आने पर सबसे बड़ा चैलेंज कॉन्टैक्ट बनाना था
मुंबई आने पर सबसे ज्यादा स्ट्रगल क्या रहा, क्या रिजेक्शंस भी फेस करने पड़े? कहा, ‘मुंबई आने के बाद सबसे बड़ा चैलेंज तो यही था कि मैं किसी को जानती नहीं थी। कुछ पता ही नहीं था कि जाना कहां है, मिलना किससे है? प्रोसेस के बारे में दूर-दूर तक कुछ जानकारी नहीं थी। जहां तक रिजेक्शंस की बात है तो जरूर, एक एक्टर को रिजेक्शंस तो फेस करने ही पड़ते हैं। इसमें कोई बुराई भी नहीं है।’
कई बार ऑडिशन में रिजेक्शन भी मिला
अभी तक के करियर के कुछ अच्छे और बुरे अनुभव के बारे में बताइए? प्रशंसा ने कहा, ‘मिर्जापुर में काम मिलना सबसे अच्छा अनुभव रहा। काफी सारे अच्छे एक्टर्स के साथ काम करने का मौका मिला। कई अच्छे दोस्त बने, उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला।
मेरे काम की सराहना हुई, ये मेरे लिए एक अच्छा मोमेंट था। जहां तक बुरे एक्सपीरियंस की बात है तो मैंने कई सारे ऑडिशन दिए थे, जहां मेरा सिलेक्शन नहीं हो पाया। अब क्यों नहीं हो पाया, इसके बारे में बात करना जरूरी नहीं है।’

मिर्जापुर सीरीज के बाद लोग जानने-पहचानने लगे
प्रशंसा ने बताया कि मिर्जापुर सीरीज के बाद उनकी लाइफ में काफी बदलाव आए। लोग उन्हें जानने-पहचानने लगे। उन्हें एक पहचान मिली, जिसकी उम्मीद लेकर वे मुंबई आई थीं। प्रशंसा ने आगे कह, ‘जब मैं मुंबई आई तो मेरे पेरेंट्स को भी कई लोग समझाने वाले मिले होंगे कि अपनी बेटी को क्यों इतना आजाद छोड़कर रखा है। आज मेरे पेरेंट्स को लगता होगा कि उनका मुझे मुंबई भेजने का फैसला बिल्कुल सही था।’
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